डोकलाम विवाद को भूलते हुए चीन ने भारत से दोस्ती का हाथ बढ़ाया है. पीपुल्‍स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की 68वीं एनिवर्सरी पर भारत में चीन के राजदूत लूओ झाओहुई ने यह बात कही.

उन्होंने कहा, "हमें पुराने विवादों को भूल कर नई दिशा की ओर कदम बढ़ाना चाहिए और जिससे दोनों देशों को फायदा होगा."

लूओ झाओहुई ने कहा, "चीन भारत का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार है. हमने द्विपक्षीय स्तर पर बहुत तरक्की की है. खासकर अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मामलों में प्रगति हुई है."

उन्होंने कल कहा कि इस महीने की शुरुआत में श्यामेन में ब्रिक्स सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. दोनों नेताओं ने 'मिलाप' और 'सहयोग' का साफ संदेश दिया था.
लूओ झाओहुई ने कहा कि चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. लेकिन, कुछ मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच तकरार बनी हुई है. इसमें डोकलाम विवाद भी एक है. हालांकि, अभी हालात कुछ बदल रहे हैं.

चीनी राजदूत ने कहा, "हमें पुराने पन्नों को पलटना चाहिए. एक नई दिशा से नए अध्याय की शुरुआत करनी चाहिए.

हमें एक और एक को दो नहीं, बल्कि ग्यारह बनाना चाहिए. बता दें कि भारत और चीन के बीच 1962 में युद्ध हुआ था. दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय विवाद है.

क्या है डोकलाम विवाद?
भौगोलिक रूप से डोकलाम भारत, चीन और भूटान बार्डर के तिराहे पर स्थित है. जिसकी भारत के नाथुला पास से मात्र 15 किलोमीटर की दूरी है. चुंबी घाटी में स्थित डोकलाम सामरिक दृष्टि से भारत और चीन के लिए काफी महत्वपूर्ण है.

साल 1988 और 1998 में चीन और भूटान के बीच समझौता हुआ था कि दोनों देश डोकलाम क्षेत्र में शांति बनाए रखने की दिशा में काम करेंगे.

डोकलाम में एक सड़क निर्माण को लेकर, भारतीय सशस्त्र बलों और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बीच पिछले दो महीने से गतिरोध था.

18 जून, 2017 को इस गतिरोध की शुरुआत हुई, जब करीब 300 से 270 भारतीय सैनिक दो बुलडोजर्स के साथ भारत-चीन सीमा पार कर पीएलए को डोकलाम में सड़क बनाने से रोक दिया.

9 अगस्त, 2017 को, चीन ने दावा किया कि सिर्फ 53 भारतीय सैनिक और एक बुलडोजर अभी भी डोकलाम में हैं.

भारत ने इस दावे को नकारते हुए कहा है कि उसके अभी भी वहां करीब 300-350 सैनिक मौजूद हैं. हाल ही में भारत ने बातचीत के जरिये इस विवाद को सुलझाया है.

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