Vishnu Dayal ब्यूरो चीफ , फरीदाबाद 


 अस्पताल बीमार लोगो का इलाज करते है परन्तु  बड़े-बड़े नामी ग्रामी हॉस्पिटल खुद ही भ्रष्टाचार , धोखा व फरेब नामक बीमारीयों से ग्रस्त है | इनका इलाज समाज हित के लिए बहुत जरुरी है | आख़िरकार दिल्ली सरकार ने वो कदम उठा ही लिया जिसकी लोगों ने उम्मीद लगा रखी थी. ज़िंदा बच्चे को मरा हुआ बताकर घरवालों को सौंपने वाले मैक्स हॉस्पिटल का लाइसेंस कैंसिल कर दिया गया. ये वो कदम है जिसकी तारीफ़ होनी ही चाहिए.
दिल्ली के शालीमार बाग़ में स्थित मैक्स हॉस्पिटल ने 30 नवंबर को दो नवजात जुड़वा बच्चों को मृत घोषित करके परिजनों को सौंप दिया था. बाकायदा प्लास्टिक के पार्सल में पैक करके. जब बच्चों का अंतिम संस्कार होने लगा तो घरवालों ने पाया कि एक बच्चा ज़िंदा है. तभी से मामले ने तूल पकड़ लिया था. ज़िंदा निकल आए बच्चे का कुछ समय तक पीतमपुरा के अग्रवाल हॉस्पिटल में इलाज चलता रहा. फिर उसने भी हिम्मत हार दी. उसकी भी डेथ हो गई.
पहले बच्चे की मौत के साथ ही इसकी जांच शुरू हो गई थी. हॉस्पिटल के दो डॉक्टर्स को सस्पेंड भी कर दिया गया था. सरकारी जांच कमिटी की प्राइमरी रिपोर्ट में भी हॉस्पिटल की ही ग़लती पाई गई थी. कई सारी गड़बड़ियां पाई गई थीं.
जैसे,
1. नवजात बच्चों के इलाज के लिए बनाई गई गाइडलाइंस को फॉलो नहीं किया गया.
2. बच्चा ज़िंदा है या नहीं ये जांचने के लिए ईसीजी जांच ज़रूरी होती है, जो नहीं की गई.
3. हॉस्पिटल के EWS में मरीजों की सुविधाएं अपडेट नहीं थीं.
4. दिल्ली सरकार ने हॉस्पिटल को एक्स्ट्रा बेड लगाने की जब तक के लिए परमिशन दी थी, उसके बाद भी बेड लगाए गए थे.
5. जहां सिर्फ बुखार के मरीजों को रखना था, वहां दूसरे मरीज़ों को रखा जा रहा था.

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन ने कहा कि इस घटना को किसी हाल में कबूल नहीं किया जा सकता. मैक्स हॉस्पिटल को लापरवाही के एक और मामले में 22 नवंबर को भी नोटिस दिया जा चुका था. चेतावनी भी दी गई थी कि कोई और शिकायत आने पर लाइसेंस भी कैंसिल किया जा सकता है. अब फाइनल रिपोर्ट आने के बाद लाइसेंस कैंसिल कर दिया गया है.
मैक्स हॉस्पिटल में नए मरीजों को लेने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है. ओपीडी सेवाएं भी बंद करा दी गई हैं. फिलहाल हॉस्पिटल में भर्ती पुराने मरीजों का इलाज चल सकता है. मरीज़ चाहे तो किसी और हॉस्पिटल भी जा सकते हैं. हॉस्पिटल उन्हें जबरन नहीं रोक सकता.

मंत्री जी ने बताया था कि डॉक्ट रों पर कार्रवाई के संबंध में मेडिकल काउंसिल को मामला भेजा गया था. वहां से फैसला आने के बाद ही ये कदम उठाया गया है. कहा जा रहा है कि डॉक्टीरों पर भी बड़ी कार्रवाई किए जाने की संभावना है.
दिल्ली की केजरीवाल सरकार का ये फैसला कई मायनों में स्वागत योग्य है. इन महंगे हॉस्पिटल्स की मनमानियां भयानक मात्रा में बढ़ गई थीं. बेवजह के टेस्ट्स करवाकर पैसे लूटने से लेकर, इलाज में लापरवाही तक सब कुछ धड़ल्ले से चलाते हैं ये. मालिकान के ऊंचे कनेक्शंस की वजह इन्हें क़ानून से ऊपर होने का गुमान हो गया लगता था. ऐसे कड़े फैसले इनके गुब्बारे में पिन तो चुभा ही देंगे. बाकी राजनैतिक आलोचना अपनी जगह लेकिन दिल्ली सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में ज़ोरदार काम कर रही है ये सच है.

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