विष्णु दयाल ,ब्यूरो चीफ


फरीदाबाद 21/03/2018: देश की राजनीति इस कदर भ्रष्ट  हो चुकी है की आज के समय लोग अपनी योग्यता पर नहीं अपनी जाति व धर्म के आधार पर समाज को गुमराह करके शासन पाना चाहते है | जनता इनसे यह उम्मीद लगाए रखती है की शायद यह नेता संसद भवन में जा कर हमारी समस्याओं को रखेगा | परन्तु कुछ समय से एसा देखा जा रहा है की ये सांसद संसद भवन में जा कर समय  से अपना ब्रेकफ़ास्ट व लंच तो करता है परन्तु जनता की समस्याओं व उनके अधिकारों की बात करने की बजाय हंगामे करने में दिलचस्पी दिखा कर  सदन की कार्यवाही रोक देता है | इन हरकतों से नुक्सान उस संसद भवन में बैठे उन सांसदों का नहीं अपितु देश की जनता का होता है | क्योकि सदन की कार्यवाहीचाहे चले या न चले उसको अपना वेतन समय से मिलता है , जो की देश की जनता विभन्न प्रकार के टेक्स के रूप में सरकार को अदा करती है |
देश का एक आम नागरिक अगर एक दिन अपना दिया हुआ काम न करे तो कोई भी कम्पनी उसको उस दिन का मेहनताना नहीं देती | यह इस देश का ही नहीं पुरे विश्व का नियम है | इसी बात पर गौर करते हुए  दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद मनोज तिवारी ने पहल की है | सांसद मनोज तिवारी ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर संसद में सदन की कार्यवाही रोकने वाले सांसदों का वेतन काटने की अपील की है | उन्होंने लिखा है कि संसद में जिस तरह से सांसद रोज हंगामा करते हैं, सदन का काम प्रभावित होता है | ऐसा नियम बनाया जिससे जिस दिन काम न हो उस दिन सांसदों का वेतन काट लिया जाए |


उन्होंने पत्र लिखकर स्पीकर सुमित्रा महाजन से अनुरोध किया है कि नो वर्क ने पे को संसद में लागू किया है | अपने पत्र के शुरुआत में ही भाजपा नेता ने लिखा है कि वह यह पत्र संसद में चल रहे गतिरोधों को बंद किए जाने के लिए लिख रहे हैं | उन्हें बुरा लगता है जब संसद के कीमती समय को व्यर्थ की बहसों में नष्ट किया जाता है | सांसदों का यह अनुचित व्यवहार दर्शाता है कि वह अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहे हैं | जो समय जनता के लिए योजनाएं बनाने में खर्च होना चाहिए था उसे लोग विरोध प्रदर्शनों में खर्च कर रहे हैं |

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