विष्णु दयाल ,ब्यूरो चीफ (फरीदाबाद)


फरीदाबाद 09/04/2018:  उपवास व अनसन एक आम आदमी के वो हथियार है , जिनका इस्तेमाल वह जब करता है  ,जब उसे  लगता है  कि ज़िम्मेदार लोग  आम लोगों के हक में काम नहीं कर रहे. या आम लोग ज़िम्मेदारी नहीं दिखा रहे | उपवास करने के लिए  दीर्ण संकल्प व सत्यता के साथ आत्म विश्वास का होना अति आवश्यक है , जो आजकल के नेताओं में बिलकुल भी नहीं है | उपवास महात्मा गांधी जी करते  थे और उनके उपवास को भयंकर रिस्पॉन्स मिलता था. और इसी रिस्पॉन्स की लालच में हमारे यहां उपवास की रवायत पड़ गई. कोई ‘सद्भावना’ में रखता है, कोई सरकार की विफलता के खिलाफ |
गौरतलब है कि आज कांग्रेस दलितों पर अत्याचार, संसद न चलने देने और सांप्रदायिक सौहार्द के मुद्दे पर पूरे देश में अनशन कर रही है |अशोक गहलोत की तरफ से पार्टी के सभी प्रदेश अध्यक्षों, एआईसीसी महासचिवों/प्रभारियों और विधायक दल के नेताओं के भेजे गए दिशा निर्देश में कहा गया है कि सांप्रदायिक सौहार्द को बचाने और बढ़ाने के लिए सभी राज्यों और जिलों के कांग्रेस मुख्यालयों में 9 अप्रैल को उपवास रखा जाए. वहीं बीते शुक्रवार को बीजेपी संसदीय दल की बैठक में फैसला लिया गया कि बीजेपी सांसदों से कहा कि वे कांग्रेस की विभेदकारी नीतियों के खिलाफ 12 तारीख़ को उपवास रखें. दलितों के मामले में जिस तरह के तूल पकड़ा और भारत बंद के दौरान जो हिंसा हुई उसके पीछे बीजेपी विपक्ष को ज़िम्मेदार ठहरा रही है. जाहिर है कांग्रेस और बीजेपी दोनों उपवास के ज़रिए अपने अपने तरीक़े से दलितों के हक़ में खड़ा दिखने की कोशिश कर रही है.
आज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी एक  उपवास रखा, वो दूसरा वाला था. उनके साथ कांग्रेस के और नेता भी उपवास पर बैठे थे, महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर | और इसी उपवास के चक्कर में कांग्रेस की फजीहत हो  रही है | वो भी कायदे से. क्योंकि सोशल मीडिया पर एक फोटू तैर रही है जिसमें कांग्रेस नेता अजय माकन, अरविंदर सिंह लवली और हारुन यूसुफ उपवास से कुल दो घंटे पहले छोले भटूरे खाते नज़र आ रहे हैं |
ट्विटर पर ये फोटू भाजपा नेता हरीश खुराना ने पोस्ट की थी –
इस पर कांग्रेस नेता अरविंदर सिंह लवली बस इतना कह पाए कि फोटू 8 बजे से पहले की है और उनका उपवास प्रतीकात्मक था, न कि कोई आमरण अनशन. खुराना की तरह ही उन्होंने भी एक दमदार क्लोज़िंग देने की कोशिश की |

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