विष्णु दयाल , ब्यूरो चीफ फरीदाबाद (हरियाणा)


फरीदाबाद 19/06/2018 : पीडीपी-बीजेपी गठबंधन के टूटने के बाद जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू होने की संभावना तेज हो गई है | अगर ऐसा होता है तो 40 साल में आठवीं बार ऐसा होगा | वहीं एनएन वोहरा के राज्यपाल रहते यह चौथा मौका होगा जब राज्य में केंद्र का शासन होगा | पूर्व नौकरशाह वोहरा 25 जून 2008 को जम्मू कश्मीर के राज्यपाल बने थे |

पीडीपी के साथ जम्मू कश्मीर में करीब तीन साल गठबंधन सरकार में रहने के बाद भाजपा ने सरकार से समर्थन वापसी की मंगलवार को घोषणा की | भगवा पार्टी ने कहा कि राज्य में बढ़ते कट्टरपंथ और आतंकवाद के चलते सरकार में बने रहना मुश्किल हो गया था |

विडंबना यह भी है कि निवर्तमान मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के दिवंगत पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद की उन राजनीतिक घटनाक्रमों में प्रमुख भूमिका थी, जिस कारण राज्य में सात बार राज्यपाल शासन लागू हुआ | पिछली बार मुफ्ती सईद के निधन के बाद आठ जनवरी 2016 को जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू हुआ था | उस दौरान पीडीपी और भाजपा ने कुछ समय के लिए सरकार गठन को टालने का निर्णय किया था |

तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से संस्तुति मिलने पर जम्मू कश्मीर के संविधान की धारा 92 को लागू करते हुए वोहरा ने राज्य में राज्यपाल शासन लगाया था | जम्मू कश्मीर में मार्च 1977 को पहली बार राज्यपाल शासन लागू हुआ था | उस समय एलके झा राज्यपाल थे | सईद की अगुवाई वाली राज्य कांग्रेस ने नेशनल कांफ्रेंस के नेता शेख महमूद अब्दुल्ला की सरकार से समर्थन वापस ले लिया था, जिसके बाद राज्यपाल शासन लागू करना पड़ा था |

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