विष्णु दयाल , ब्यूरो चीफ फरीदाबाद (हरियाणा)


फरीदाबाद 28/06/2018:  फरीदाबाद के नीमका गाँव में जनवरी महीने में एक दिल दहला देने वाली गैंगरेप की घटना होती है, जिसके लिए पीड़िता और उसका परिवार न्याय के लिए प्रशासन से मदद मांगता है। परंतु उन्हें न्याय के बजाय सिर्फ झूंठे दिलासे व प्रसाशन की दुत्कार मिलती है। हार थक के इस परिवार ने अप्रैल में बीके चौके पर धरना दिया, जिसमे कार्यवाही तो थोड़ी आगे बढ़ी परंतु उसके बावजूद आज भी हालात ज्यों के त्यों बने हुए है।
कोर्ट की तरफ से पॉलीग्राफ टेस्ट के ऑर्डर पुलिस को मिल चुके है फिर भी पुलिस पॉलीग्राफ टेस्ट नहीं करा रही है, आखिर क्यों? इसका मतलब कहीं न कहीं तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। या फिर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
आज जब हमारे न्यूज़ चैनल के पत्रकार ने इस घटना के पीड़ित परिवार से बात की तो इस घटना से पीड़ित महिला ने अपना दुःख रो-रो कर पूरी मीडिया के सामने रखा |
समाजसेवी नवीन सैनी  का कहना है कि - अगर यह परिवार झूंठा है तो पुलिस तफ्तीश करके इनको अंदर करे और अगर ये सही हैं तो इनको न्याय दिलाए।
यह पीड़ित परिवार फिर से बीके चौक पर न्याय के लिए पिछले लगभग 10 दिनों से इस तपती चिलचिलाती गर्मी में अपने बच्चों सहित बैठा है और न्याय की बाट झो रहा है।
समाजसेवी पारमिता चौधरी ने बताया की समाज के अंदर महिलाओँ के साथ होने वली इस प्रकार की घटनाए भ्रष्ट प्रशासन की नाकामी का सबसे बड़ा सबीत है | यह घटना प्रधानमंत्री की “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ “ के अभियान को ठेंगा दिखता है |

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