: विष्णु दयाल , ब्यूरो चीफ फरीदाबाद (हरियाणा)


फरीदाबाद 04 /05/2018:  दिल्ली व एनसीआर के आस पास के क्षेत्रोँ में प्रदुषण का स्तर काफी बढ चूका है | जिसके कारण यहाँ रहने वालों के स्वस्थ पर बुरा असर पड़ रहा है | इसी के चलते छोटे बच्चो व महिलाओं  से लेकर बड़ी उम्र के पुरुषो को आँखों से सम्बंधित रोगों से पीड़ित हैं |
रविवार को “ऊँ श्री ब्राह्मण समाज व पूर्वांचल एकता परिषद्” ने डबुआ कालोनी में एस एम आर पब्लिक स्कूल में एक निशुल्क नेत्र चिकित्सा शिवर लगा कर क्षेत्रवासियों को काफी राहत दी |
इस मौके पर संस्था के चेयरमैन विनोद भरद्वाज जी ने बताया की उनकी संस्था इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर कर के गरीब , मजदूर व हर वर्ग के लोगो को अपनी सेवा प्रदान करती रहती है | अब तक लगभग 500 लोगो ने अपनी आँखों के चेक करने का रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं |
संस्था के प्रधान राजकुमार जी ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया की  इस महंगाई के युग में एक गरीब टपके का इंसान को अगर आपनी आँखों का ओपरेशन करवाना पड़े तो लगभग 30 से 40 हजार का खर्चा व नहीं झेल पाता | परन्तु उनकी संस्था इस निशुल्क नेत्र चिकित्सा शिवर के माध्यम से ऐसे लोगो का पूरी जांच के साथ-साथ निशुल्क ओपरेशन की भ वयवस्था  भी करवाएगी |
समाजसेवी संजीव कुशवाहा जी ने बताया की इस निशुल्क नेत्र चिकित्सा शिवरके माध्यम से तकरीबन 250 आँखों के चश्मों का वितरण निशुल्क किया जाएगा | उन्होंने बताया की उन्हें हैरानी होती है की एक 6 साल के बच्चे को भी चश्मे की जरुरत पड़ रही है ,जिसका मुख्य कारण बच्चो का ज्यादातर समय टीवी व कम्पूटर के आगे व्यतीत करना | उन्होंने बताया की देश के अंदर बढ़ रहा प्रदुषण इसका सबसे बड़ा कारण है | अतः हमे अधिक से अधिक मात्र में पेड़-पौधे लगाना चाहिए और कूड़ा-कर्कट खुले में नहीं जलाना चाहिए |
इस अवसर पर संस्था के सभी सदस्यों ने तारा नेत्रालय व डॉक्टरों का भी विशेष रूप से  आभार प्रकट किया |
कार्यक्रम के इस मौके पर कल्पना गोयल,दीपेश मित्तल,मोहन सिंह भाटिया,गोल्डी नेगी,विनोद भरद्वाज,राजकुमार,संजीव कुशवाहा,महेन्द्र पाठक व अन्य संस्थाओं के की वरिष्ठ लोग काफी मात्र में उपस्थित थे |
[6/4, 11:25] vishnu dayal: विष्णु दयाल , ब्यूरो चीफ फरीदाबाद (हरियाणा)
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सप्तम अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन में हिन्दू समाज को भ्रष्टाचार मुक्त व मजबूत बनाने पर विचार किया गया   :-


   फरीदाबाद 04 /06/2018: फोंडा, गोवा के रामनाथी क्षेत्र में स्थित   श्री विद्याधिराज सभागार में आयोजित 7 वें अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन के अंतर्गत 2 दिवसीय अधिवक्ता अधिवेशन के समापन के दिन अर्थात 3 जून को  रामनाथी (गोवा) ने सभा को संबोधित करते हुए कहा की  भ्रष्टाचार का अर्थ केवल आर्थिक लेन-देन तक सीमित नहीं है, अपितु संविधान को धर्मनिरपेक्ष बनाना भी भ्रष्टाचार ही है । धर्मनिरपेक्षता इस शब्द को संविधान में घुसेडा गया है और वहीं से संविधान तथा अध्यात्म में दूरी उत्पन्न हुई । आज न्यायतंत्र का संबंध भ्रष्टाचार के साथ आने से राष्ट्र तथा समाज गंभीररूप से प्रभावित हो रहे हैं, ऐसा दिखाई देता है । आज न्यायाधीशों की नियुक्ति किसप्रकार होती है, इसकी प्रक्रिया में सुस्पष्टता नहीं है । इस प्रक्रिया में गुणवत्ता तथा राष्ट्रवाद जैसे महत्त्वपूर्ण गुणों की उपेक्षा की जाती है । आज गुणवत्ता के स्थान पर सिफारिश के आधार पर नियुक्तियां की जाने से न्यायतंत्र में भ्रष्टाचार फैलने लगा है । इस स्थिति में यदि परिवर्तन लाना है तो उसके लिए इच्छाशक्ति, क्रियाशक्ति तथा ज्ञानशक्ति की आवश्यकता है । ये तीनों धर्म से ही प्राप्त हो सकती हैं । अतः धर्माभिमानी नागरिक ही आदर्श न्यायतंत्र बनाकर, उसे कार्यरत बना सकते हैं । उसके लिए धर्मप्रेमी अधिवक्ताओ  को प्रयास करने चाहिए, ऐसा प्रतिपादन केरल के सरकारी अधिवक्ता गोविंद के भरतन् ने किया । 
        इस अवसर पर अधिवक्ता पंडित शेष नारायण पांडे, हिन्दू फ्रन्ट फॉर जस्टिस के अधिवक्ता हरि शंकर जैन, हिन्दू विधिज्ञ परिषद के अधिवक्ता नीलेश सांगोलकर आदि मान्यवर उपस्थित थे । इस अधिवेशन में सामाजिक दुष्प्रवृत्तियों के विरुद्ध सूचना अधिकार का उपयोग करने की दृष्टि से अधिवक्ताआें का संगठन, राष्ट्र एवं धर्म पर हो रहे आघातों को रोकते समय अधिवक्ताआें को प्राप्त अनुभव जैसे विविध विषयों पर चर्चा की गई ।
अधिवक्ता निलेश सान्गोलकर ने कहा कि  आज का न्यायतंत्र ब्रिटीश पद्धति से चलता है । उसमें न्याय मिलने के लिए लगनेवाला विलंब अन्यायकारी है । अतः इस त्रुटि को दूर करने के लिए अधिवक्ताआें को प्रयास करने चाहिए । न्यायतंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाज के सामने उजागर कर जनता के द्वारा आदर्श व्यवस्था बनाने का दायित्व हम पर है । आज के दिन उपलब्ध कानून का उपयोग कर अन्यायपीडितों को न्याय दिलाने तथा निरपराधों के विरुद्ध झूठे आरोप प्रविष्ट करनेवाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही के लिए हमें प्रयास करने चाहिएं ।
      अधिवक्ता हरीश जैन ने कहा कि  स्वतंत्रता के पश्चाचत राज्यकर्ताआओ ने अनेक बार संविधान के साथ छेडछाड की है । कुछ निधर्मी राज्यकर्ताओ  ने देश की संपत्ति पर मुसलमानों का पहला अधिकार होने की बात कही थी; परंतु यह देश देवताओ  का, हिन्दू धर्म का तथा यहां के मूलनिवासी हिन्दुओं  का है । अतः यह भूमि तथा साधनसंपत्ति पहले हिन्दुओं  की है; इसलिए उस पर अल्पसंख्यकों का अधिकार नहीं बनता ।
     अधिवेशन के समापन के अवसर पर सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळेजी ने हिन्दू राष्ट्र की स्थापना में अधिवक्ताआओं  का योगदान, साथ ही आनेवाले समय में संगठित रूप से करनेयोग्य प्रयास आदि के विषय में मार्गदर्शन किया ।

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