विष्णु दयाल , ब्यूरो चीफ फरीदाबाद (हरियाणा)


फरीदाबाद 04/06/2018: रामनाथी (गोवा) - संत, ऋषि, वेद, पुराण तथा भगवान शिवजी के संकल्प से हिन्दू राष्ट्र की स्थापना निश्चि.त होगी । आज कालानुसार हमारी संस्कृति परिवर्तित हो रही है, तब भी उसमें वैदिक तत्त्व है; और वेदों में क्षात्रतेज भी है । आज अन्य पंथीय उनके धर्म पर आस्था रखते हैं; परंतु हिन्दू स्वधर्म पालन नहीं करते । हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए हिन्दुओं से चिंतन और आत्ममंथन होकर उनमें बौद्धिक सुस्पष्टता आनी चाहिए । इसके लिए धर्म की अवधारणा स्पष्ट होना आवश्यक है । आज देश के हिन्दू कूपमंडूक बन गए हैं । दूसरी ओर महिलाओं  पर अत्याचार हो रहे हैं । वर्तमान में चारों दिशाओं  में आग लगी है । महिलाओं  को झांसी की रानी की भांति सक्रिय होकर आगे आना चाहिए । देश में भीतर और बाहर से आक्रमण हो रहे हैं । अपने साथ समाज का क्षात्रतेज भी अध्यात्म द्वारा जागृत होना चाहिए । इसके लिए हिन्दुओं  को कर्तापन त्यागकर अधर्म के विरुद्ध कार्य करना चाहिए । हमें महिलाओं  के साथ आगे आकर दोषों का निवारण करते हुए एकत्र कार्य करना चाहिए । इस प्रकार स्वयं में अग्नि जागृत कर कार्य करने से अंधःकार नष्ट हो सकता है । हिन्दुओं  के ब्राह्मतेज के साथ क्षात्रतेज जागृत करने से भारत सहित पूरे विश्वा में सर्वत्र हिन्दू राष्ट्र की स्थापना होगी, ऐसा ओजस्वी मार्गदर्शन श्री लालेश्वसर महादेव मंदिर, बिकानेर (राजस्थान) के महंत स्वामी संवित् सोमगिरिजी महाराज ने उपस्थित हिन्दुत्वनिष्ठों को किया । वे रामनाथी, गोवा के श्री रामनाथ देवस्थान के श्री विद्याधिराज सभागृह में आयोजित सप्तम अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए क्षात्रतेज की उपासना की आवश्यकता इस विषय पर बोल रहे थे । अधिवेशन के प्रारंभ में महंत स्वामी संवित् सोमगिरिजी महाराज, हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळे, सनातन की धर्मप्रचारक सद्गुरु (कु.) अनुराधा वाडेकर एवं सद्गुरु नंदकुमार जाधवजी के शुभहस्तों दीपप्रज्वलन किया गया । इस समय देश-विदेश के 150 से अधिक हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के 250 से अधिक धर्मप्रेमी उपस्थित थे । इस अधिवेशन में कश्मीर की समस्या, धारा 370 निरस्त करना, पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं श्रीलंका के हिन्दुओं  पर हो रहे अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना, राष्ट्र एवं धर्म पर होनेवाले आघात रोकने के लिए उपाय, हिन्दू राष्ट्र-स्थापना के कार्य की आगामी दिशा आदि विविध विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी ।


 सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळे ने कहा कि भारत में बहुसंख्यक समुदाय के शीर्षस्थ नेताआें को एकत्र आने में कानूनन प्रतिबंध है क्या ? इसका उत्तर नहीं होते हुए भी प्रश्नख क्यों निर्माण होते हैं ?इसका एकमात्र कारण है, भारत में बहुसंख्यकों को सनातन धर्म को संवैधानिक संरक्षण नहीं है ! इसलिए आज कोई भी उठता है और हिन्दुओं  को अपराधी ठहराने का प्रयास करता है । विश्वं के सभी देशों में उनके  संविधान द्वारा वहां के बहुसंख्यकों का धर्म, संस्कृति, भाषा एवं हित को संरक्षण दिया गया है । केवल भारत ऐसा एकमात्र देश है कि जहां बहुसंख्यक हिन्दू होते हुए भी उन्हें संविधान द्वारा कोई संरक्षण नहीं दिया गया है । इसके विपरीत भारतीय संविधान ने अल्पसंख्यको के पंथ, संस्कृति, भाषा और हित को रक्षा प्रदान की है । यह संविधान के समता के तत्त्व के (अर्थात लॉ ऑफ इक्वॅलिटी के) विरुद्ध है । भारत में बहुसंख्यक हिन्दुआें को धर्म, संस्कृति, भाषा एवं हित को संवैधानिक संरक्षण मिले, इसके लिए ही हिन्दू संगठनों का यह अधिवेशन है, ऐसा मार्गदर्शन हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळेजी ने किया ।

हिन्दू जनजागृति समिति के केंद्रीय समन्वयक श्री. नागेश गाडे ने अधिवेशन के उद्देश्य से अवगत कराते हुए कहा, विश्व् में ईसाई समुदाय के 152, इस्लामी57, बौद्धों के 12 राष्ट्र, जबकि ज्यू का इस्रायल नामक एक राष्ट्र है; परंतु हिन्दुआें का इस पृथ्वी पर एक भी राष्ट्र नहीं है । वैश्विंक पटल पर आगामी 5 वर्षों में भारत और नेपाल ये दो हिन्दू राष्ट्र पुनर्स्थापित हों, इस उद्देश्य का विचारमंथन हो और हिन्दू संगठनों का योजनाबद्ध पद्धति से इस दिशा में मार्गक्रमण हो, यही इस अधिवेशन का मुख्य उद्देश्य है । हिन्दू राष्ट्र-स्थापना केवल भारत तक ही सीमित नहीं; अपितु वेदमंत्रों के अनुसार संपूर्ण पृथ्वी एक राष्ट्र है, इस समुद्रवलयांकित पृथ्वी पर भविष्य में हिन्दू राष्ट्र स्थापित करना है ।
    अधिवेशन के उद्घाटन समारोह पर प्रारंभ में शंखनाद किया गया । दीपप्रज्वलन के उपरांत सनातन पुरोहित पाठशाला के पुरोहितों ने वेदमंत्रों का पठन किया । तदुपरांत वहां उपस्थित संतों के शुभहस्तों मराठी और हिन्दी भाषा में हिन्दू जनजागृति समिति समर्थित हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हेतु हिन्दुआें का संगठन करें!, मराठी और हिन्दी भाषा में सनातन के स्वभावदोष (षड्रिपु) निर्मूलनका महत्त्व एवं गुण-संवर्धन प्रक्रिया इन ग्रंथों का प्रकाशन किया गया । इस अवसर पर श्री.प्रदीप खेमका ने हिन्दू जनजागृति समिति के प्रेरणास्थान परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी द्वारा अधिवेशन के शुभ अवसर पर भेजा संदेश पढकर सुनाया । कार्यक्रम का सूत्रसंचालन समिति के श्री. सुमीत सागवेकर ने किया ।
      इस अधिवेशन में हिन्दू जनजागृति समिति के अंतर्गत उद्योगपति परिषद और आरोग्य सहायता समिति की स्थापना की गई । इन संगठनों के बोधचिन्ह का अनावरण वेदमंत्रों के घोष के बीच महंत स्वामी संवित् सोमगिरिजी महाराज के मंगल हस्तों किया गया । समिति के केंद्रीय समन्वयक श्री. नागेश गाडे ने संगठन के उद्देश्य की विस्तृत जानकारी दी । हिन्दुत्वनिष्ठों की सहायता करने के लिए उद्योगपति परिषद तथा आपातकाल में समाज की सहायता और चिकित्सकीय क्षेत्र की दुष्प्रवृत्तियों का निर्मूलन करने हेतु आरोग्य सहायता समिति इस उद्देश्य से ये दोनों संगठन कार्य करेंगें ।

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