विष्णु दयाल ब्यूरो चीफ फरीदाबाद


फरीदाबाद 17 नवम्बर 2018 :  देश भर में 25 लाख के करीब मिड डे मील वर्कर्स हैं। वर्कर्स में बड़ा हिस्सा विधवा व सामाजिक रूप से कमजोर तबकों की महिलाओं का है। स्कूलों में बच्चों को भोजन तैयार करके कुपोषण दूर करने वाली ये महिलाएं खुद कुपोषण का शिकार हैं। क्योंकि केंद्र सरकार वर्कर्स से 6 घण्टे से भी ज्यादा काम ले रही है व मामूली मानदेय देकर मेहनत की भारी लूट कर रही है। स्कूलों में विशेष कर प्राइमरी स्कूलों में चौथे दर्जे का कोई कर्मचारी नहीं है इसलिए अधिकतर जगहों पर यह काम भी मिड डे मील वर्कर्स को करना पड़ रहा है। इस लूट के खिलाफ मिड डे मील वर्कर्स में भारी रोष है।

19 नवंबर को देश भर से मिड डे मील वर्कर्स संसद के सामने पहुंचेंगे। वर्कर्स प्रधानमंत्री से जवाब मांगने जाएंगे कि आखिर 10 साल बाद भी केंद्र सरकार ने हमारे मानदेय में बढ़ोतरी क्यों नहीं की। उन्होंने आंगनवाड़ी, आशाओं का मानदेय बढ़ा दिया आख़िर हमें क्यों छोड़ा। भाजपा सरकार धीरे-धीरे मिड डे मील योजना को  निजी हाथों में देने के प्रयास कर रही है व बड़े उद्योगपति घरानों को इसे देने की फिराक में है। इसका भारी प्रतिरोध हो रहा है व 19 को संसद पर जोरदार प्रदर्शन होगा व प्रधानमंत्री से जवाब मांगा जाएगा की हमारी मेहनत की मजदूरी हमे क्यों नही दी जा रही।
इस प्रदर्शन में सी.टू. की ओर से सचिव लाल बाबु शर्मा , निरंतर पराशर ,मिड डे मिल के जिला प्रधान कमलेश चौधरी मौजूद रहे | इस प्रदर्शन में सैकडों मिड डे मिल कार्यकर्त दिल्ली संसद भवन का घेराव करेंगे |

Post A Comment:

0 comments: