विष्णु दयाल ब्यूरो चीफ फरीदाबाद

फरीदाबाद 21/12/2018 : लगता है भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के लिए देश के विकास से ज्यादा जरूरी कार्य हनुमान जी की जाति की पहचान करना हो गई है। आये दिन ये लोग अपने अनमोल ज्ञान के भण्डार से नए नए तर्क दे कर हनुमानजी को जाति व धर्म का प्रमाण पत्र देने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।

भगवान हनुमान की जाति और धर्म को लेकर उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले दलित और फिर मुसलमान बताए जाने के बाद अब उन्हें जाट करार दिया गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में धर्मार्थ कार्य मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने गुरुवार (20 दिसंबर) को विधान परिषद में प्रश्नकाल के बीच कहा, “दूसरों के फटे में जो टांग अड़ाता है, वही जाट हो सकता है। हनुमान मेरी जाति के थे।” बता दें कि लक्ष्मी नारायण जाट हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सदन में कबीना मंत्री का यह बयान सुनकर कुछ हंसे तो कुछ लोग चौंक गए, मगर कुछ ही पलों बाद सदन में इस टिप्पणी को लेकर हो-हल्ला मच गया। बाद में वहां हिंदू देवी-देवताओं के अपमान से संबंधित प्रस्ताव पेश किया गया।
हालांकि, चर्चा में सदन के नेता डॉ.दिनेश शर्मा ने कहा कि चुनाव से पूर्व विपक्ष राजनीतिक फायदे के लिए फिजूल के मुद्दे उठाता रहा। अब उसकी तरफ से सदन में गलत बयानबाजी हो रही है। हमारी ओर से इस बारे में स्पष्टीकरण दिया जा चुका है। सभापति ने इसके बाद प्रस्ताव कबूलने से मना कर दिया।
बाद में समाचार एजेंसी एएनआई से कबीना मंत्री बोले, “मैंने इतना कहा था- हम किसी भी स्वभाव से यह पता करते हैं कि वह किसके वंशज होंगे। जैसे वैश्य जाति को लेकर हम मानते हैं कि वह अग्रसेन के वंशज हैं। कारण- महाराजा अग्रसेन स्वयं व्यापार करते थे। ऐसे ही जाट का स्वभाव का स्वभाव होता है कि अगर किसी के साथ अन्याय हो, तो वह बगैर बात के, जान-पहचान के बिना वह उसमें कूद पड़ता है। जिस तरह भगवान राम की पत्नी सीता का अपहरण हुआ, अब हनुमान उसमें दास के रूप में बीच में शामिल हुए। हनुमान जी की प्रवृत्ति जाटों से मिलती है, लिहाजा मैंने कहा कि हनुमान जाट ही होंगे।”

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