विष्णु दयाल ब्यूरो चीफ फरीदाबाद

फरीदाबाद 27 जून : ओडिशा के क्योंझर ज़िले के खनिज संपन्न तालबैतरणी गांव के रहने वाले दैतारी नायक ने सिंचाई के लिए वर्ष 2010 से 2013 के बीच अकेले ही गोनसिका का पहाड़ खोदकर तीन किलोमीटर लंबी नहर बना दी थी. इस नहर से अब 100 एकड़ ज़मीन की सिंचाई होती है. उन्होंने कहा कि वह पद्मश्री सम्मान लौटाना चाहते हैं ।
इस साल मार्च में राष्ट्रपति भवन में दैतारी नायक को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री सम्मान दिया था।
भुवनेश्वर: ओडिशा के आदिवासी किसान और पद्मश्री से सम्मानित दैतारी नायक को यह सम्मान पाने के बाद दो जून की रोटी जुटाने के लिए भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. हाल ये है कि जिंदा रहने के लिए वह चींटियों के अंडे खाने को मजबूर हैं. यह सम्मान मिलने के बाद उन्हें कोई काम नहीं मिल रहा है।
हालात इतने बुरे हैं कि अब वह अपना पद्मश्री सम्मान भी सरकार को लौटाने का मन बना रहे हैं।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दैतारी को इसी साल ओडिशा में तीन किलोमीटर नहर बनाने के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. उनका कहना है कि यह सम्मान उनके जीवनयापन में मुश्किलें पैदा कर रहा है।

ओडिशा के क्योंझर जिले के खनिज संपन्न तालबैतरणी गांव के रहने वाले दैतारी (75) ने सिंचाई के लिए 2010 से 2013 के बीच अकेले ही गोनासिका का पहाड़ खोदकर तीन किलोमीटर लंबी नहर बना दी थी. इस नहर से अब 100 एकड़ जमीन की सिंचाई होती है।

दैतारी का कहना है कि इस सम्मान ने उन्हें गरीबी की ओर धकेल दिया है. वह कहते हैं, ‘पद्मश्री ने किसी भी तरह से मेरी मदद नहीं की. पहले मैं दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करता था. लोग मुझे काम ही नहीं दे रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह मेरी प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं है. अब हम चींटी के अंडे खाकर गुजर-बसर कर रहे हैं.।

उन्होंने कहा, ‘अब मैं अपने परिवार को चलाने के लिए तेंदू के पत्ते और आम पापड़ बेचता हूं. सम्मान ने मेरा सब कुछ ले लिया है. मैं इसे वापस लौटाना चाहता हूं ताकि मुझे फिर से काम मिल सके ।
उन्होंने कहा कि हर महीने 700 रुपये की वृद्धावस्था पेंशन से उनके पूरे परिवार का जीवनयापन करना मुश्किल है. उन्हें कुछ दिन पहले इंदिरा आवास योजना के तहत एक घर आवंटित हुआ था, जो अधूरा है, जिस वजह से उन्हें अपने पुराने फूस के घर में ही रहना पड़ रहा है ।

Post A Comment:

0 comments: