फरीदाबाद , 2 सितम्बर- मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल द्वारा  सहकारी बैंकों के ऋणी किसानों को बड़ी राहत पहुंचाते हुए एकमुश्त निपटान स्कीम के तहत उनके फसली ऋणों के ब्याज व जुर्माने की 4750 करोड़ रुपये की राशि माफ करने की घोषणा को केंद्रीय राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर व हरियाणा के उद्योग व वाणिज्य मंत्री श्री विपुल गोयल ने किसानों के हित में लिया गया ऐतिहासिक निर्णय बताया है । श्री  गुर्जर ने कहा कि  इस घोषणा से प्रदेश के लगभग दस लाख किसानों को लाभ होगा। उन्होंने कहा  बड़ी बात यह भी है कि  मुख्यमंत्री ने मूल ऋण की अदायगी करने की अंतिम तिथि भी बढ़ाकर 30 नंवबर, 2019 करने की घोषणा की है जो किसानों के लिए बहुत  बड़ी राहत  है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से एक के बाद एक कर जिस तरह से सरकार ने जनहित में फैसले लिए जा रहे है वह भाजपा  सरकार की किसान हितैषी सोच है, ताकि अतीत में विपक्षी  सरकार के कार्यकाल में किसान विरोधी नीतियों से इस  वर्ग को जो झटका लगा था। उससे   किसान उससे उबर सके । 
कैबिनेट मिनिस्टर विपुल गोयल ने इस घोषणा पर कहा कि  इससे प्राथमिक सहकारी कृषि समितियों, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक, हरियाणा भूमि सुधार एवं विकास बैंक के ऋणी किसानों को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि जिन किसानों के खाते इन बैंकों द्वारा एनपीए घोषित कर दिए गए थे और किसान अपने ऋणों को नया नहीं करवा पा रहे थे,  इस घोषणा के बाद वे अपनी फसलों के ऋण खातों का चक्र बदलवा सकेंगे। उन्होंने बताया कि किसानों को सिर्फ अपनी मूल ऋण राशि ही जमा करवानी होगी। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए ब्याज व जुर्माने की राशि के निपटान के लिए यह एकमुश्त राहत प्रदान की गई है। 
श्री  गोयल ने बताया कि  राज्य  में  प्राथमिक कृषि एवं सहकारी समितियों (पैक्स) से लगभग 13 लाख किसानों ने ऋण ले रखे हैं, जिनमें से 8.25 लाख किसानों के खाते एनपीए हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि पैक्स के फसली ऋणों की चार प्रतिशत ब्याज दर राज्य सरकार वहन करती है और तीन प्रतिशत नाबार्ड वहन करता है। फसली ऋणों की अदायगी समय पर न करने वाले किसानों पर पांच प्रतिशत की दर से पैनल्टी लगाई जाती थी, जो अब पूरी तरह माफ की जाएगी। उन्होंने कहा कि ब्याज दर की चार प्रतिशत राशि राज्य सरकार की ओर से वहन की जाएगी तथा नाबार्ड की तीन प्रतिशत ब्याज की दर में से 1.5 प्रतिशत हरियाणा सरकार तथा 1.5 प्रतिशत पैक्स अपने स्तर पर वहन करेगा। उन्होंने  कहा  मुख्यमंत्री कि इस घोषणा से यह बात एक बार फिर साबित हो गई है कि वर्तमान सरकार कर्म में विश्वास करती है न कि अतीत में रही सरकारों की तरह खोखले वायदों में। उन्होंने कहा कि पैक्स के ऋणी किसानों को इस घोषण से 2500 करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा। 
उन्होंने  कहा कि इसी प्रकार, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों से 85 हजार किसानों ने 3000 करोड़ रुपये के ऋण लिए हुए है । इनमें से 32 हजार किसानों के 800 करोड़ रुपये के खाते एनपीए हो गए है । उन्होंने बताया कि इन खातों के निपटान के लिए एकमुश्त निपटान योजना के तहत, जिस तिथि से खाते को एनपीए में डाला गया था, उस तिथि से 30 नवम्बर, 2019 तक मूल राशि के साथ साधारण ब्याज देय होगा। इसके तहत, 5 लाख रुपये से कम ऋण के लिए दो प्रतिशत, पांच से दस लाख रुपये तक के ऋण के लिए पांच प्रतिशत तथा दस लाख से अधिक के ऋण के लिए दस प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज लिया जाएगा और इससे किसानों को 1800 करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा। 
श्री गोयल ने मुख्यमंत्री की ओर से की गई घोषणा की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि  तीसरी श्रेणी के हरियाणा भूमि सुधार एवं विकास बैंक(लैंड मोरगेज बैंक) के 1.10 लाख ऋणी किसान हैं, जिनमें से 70 हजार किसानों के खाते एनपीए घोषित किए जा चुके हैं। इन किसानों की मूल ऋण राशि 750 करोड़ रुपये है तथा ब्याज व जुर्माने की राशि 1400 करोड़ रुपये देय बनती है। उन्होंने कहा कि इन बैंकों के किसानों का पूरा पैनल ब्याज माफ कर दिया जाएगा। किसानों को केवल सामान्य ब्याज का 50 प्रतिशत ही देना होगा, शेष 50 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। लैंड मोरगेज बैंक के ऋणी किसानों को इस योजना से 450 करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा। 
इस घोषणा पर  विद्यायक सीमा  त्रिखा, विधायक  मूलचंद शर्मा, विधायक टेकचंद शर्मा व विधायक नगेन्द्र भडाणा ने भी स्वागत करते हुए कहा कि  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी स्वयं किसानों को समृद्ध करने के प्रति संजीदा हैं और पिछले दो सीजन से फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य कृषि लागत के 50 प्रतिशत लाभ के साथ घोषित किए हैं। उन्होंने कहा कि धान व गेहूं की फसलों की खरीद केंद्र सरकार की ओर से भारतीय खाद निगम करता है, जबकि अन्य फसलों की खरीद राज्य सरकार अपनी खरीद एजेसियों के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करती है। मुख्यमंत्री की इस घोषणा से पूरे प्रदेश के लगभग दस लाख  किसानों को आर्थिक लाभ  मिला है।

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