मथुरा आज ज्ञानदीप में प्रख्यात रंगकर्मी, निर्माता-निर्देशक व ब्रजभाषा प्रेमी संदीपन विमलकांत नागर की स्मृति में एक शोक श्रंद्धाजलि सभा का आयोजन हुआ! श्रंद्धाजलि सभा में मौजूद विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दलों के लोगों ने अपनी श्रंद्धाजलि अर्पित करते हुए रंगमच के प्रति समर्पित अजीम कलाकार और बेहतरीन इंसान बताया!
शोक सभा में  मौजूद जनसंस्कृति मंच, इप्टा, जनवादी लेखक संघ, सनराइज नाट्य ग्रुप, हिंदी प्रचार सभा, लाड़ली जूं संस्कृति संस्थान, सांवरिया फिल्म्स, संस्कार भारती, स्वास्तिक रंग मंडल, तुलसी साहित्य संस्कृति एकाडमी, ब्रज नाट्य कला केंद्र, रॉलिंग टाइम्स फि। इसी के साथ साथ साथल्म्स, व्हाइट फ्रेम थिएटर,गोमन स्टूडियो, दुर्गा पूजा समिति, बाँसुरी सांस्कृतिक संस्था, ब्रजभाषा साहित्य एवं लोककला संस्थान, अमरनाथ एडुजुकेशन इंस्टीट्यूट, आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल आदि के अलावा शहर के बुद्धिजीवी, साहित्यकार, पत्रकार रंगकर्मी ने एक स्वर से मांग करते हुए प्रस्ताव पास किया कि डैम्पियर नगर स्थित मुक्त आकाशीय रंग मंच का नाम संदीपन रंगमंच किया जाए तथा साल में एक बार संदीपन के नाम से एक सम्मान दिया जाए। इसी के साथ साथ प्रदेश सरकार से मांग की गई कि ब्रज की संस्कृति को बचाने के लिए अतिरिक्त बजट आवंटित कर ठोस कार्य किया जाए।
इस मौके पर संदीपन को याद करते हुए विभिन्न संगठन के वक्ताओं ने कहा कि संदीपन ने अंतिम समय तक नाट्य कर्म को जीया। उन्होंने अपने पीछे नाट्यकर्मीयो की विशाल फौज छोड़ी है। वह एक सफल नाट्यकर्मी के साथ सफल फिल्म निर्माता निर्देशक एवं साहित्यकार थे। सदैव समर्पण भाव से कार्य करते हुए उन्होंने मथुरा से फ़िल्म एवं सीरियल के कलाकार पैदा किये।
संदीपन के चाहने वाले देश के अन्य हिस्सों में मौजूद हैं।
उन्होंने अपने नाना अमृतलाल नागर एवं अपनी माँ डॉ. अचला नागर की विरासत को जीते जी आगे बढाया। वक्ताओं ने कहा कि बजारवाद के दौर में रंगकर्म को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया। मौजूद सभी रंगकर्मियों ने उनकी विरासत को बचाये रखने का संकल्प लिया।
शोक श्रद्घांजलि सभा की अध्यक्षता पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया ने की। इस मौके पर मौजूद लोगों में  प्रमुख रूप से डॉ आरके चतुर्वेदी, कुंवर नरेंद्र सिंह, डॉ अनिल वाजपेयी, डॉ सईद अहमद,  संगीत मर्मज्ञ डॉ राजेन्द्र कृष्ण अग्रवाल, बृजगोपाल राय चंचल, डॉ, विवेक निधि, के माहेश्वरी, निशेष जार, साधना भार्गव, अंजू मिश्रा, वंदना सिंह,  प्रेमलता राजपूत, देवेंद्रपाल, विजय आर्य विध्यार्थी, राजेश श्रीवास्तव, डॉ धर्मराज, विवेक सक्सेना बंटी, अनूप जाना, साजन चतुर्वेदी, विजय भारद्वाज, पत्रकार विवेक मथुरिया, सीपी शर्मा, कवि अनुपम गौतम, मनोज राठौर आदि रहे। संचालन रवि प्रकाश भारद्वाज ने किया।

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