संवाददाता-बबलू बंसल हटा
             टिड्डी दल प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रवेश कर गया है, दमोह जिले में भी टिड्डी दल प्रतिदिन प्रवेश कर रहा है । टिड्डी दल द्वारा बहुतायत मात्रा में फसलों/ वनस्पतियों पर बैठकर नुकसान पहुंचाने का काम कर है ।  इस स्थिति को देखते हुये कृषि विभाग एवं संबंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश दिये है।  वर्तमान में खरीफ सीजन प्रारंभ हो गया है, फसलो की बुबाई चल रही है। कुछ क्षेत्रों में फसलों का अंकुरण भी हो गया है। ऐसी स्थिति में टिड्डी दल से फसलों में नुकसान होने की पूर्ण संभावना प्रतीत हो रही है। कृषक टिड्डी दल के नियंत्रण हेतु पूर्व से ही तैयारी रखे। टिड्डी दल के प्रकोप के नियंत्रण हेतु यह आवश्यक है कि, नजदीकी स्थानों से प्राप्त सूचना अनुसार पूर्व से ही ध्वनि विस्तारक यंत्र जैसे मांदल, ढोलक, डी.जे. ट्रैक्टर का सायलेंसर निकालकर आवाज करना, खाली टीन के डिब्बे इत्यादि स्थानीय स्तर पर तैयार रखें, जिससे कि सामूहिक प्रयास से उक्त ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग किया जा सके फसलस्वरुप टिड्डी नीचे आकर फसल /वनस्पति पर न बैठते हुये आगे प्रस्थान कर जाये ।

            उपसंचालक कृषि ने कहा है टिड्डी दल का रात्रि विश्राम की स्थिति में टिड्यिों में प्रभावी नियंत्रण हेतु हस्तचलित स्प्रेयर, पावर ऑपरेटिड स्प्रेयर या ट्रेक्टर ऑपरेटिड स्प्रेयर से रासायनिक कीटनाशक जैसे प्रोफेनोफास 40 ई.सी. साईपर मैथ्रिन 4 ई.सी. की 800 एम.एल. प्रति हैक्टेयर, डेल्टामैथ्रिन 2.8 ई.सी. 600 एम.एल. मात्रा, लैमडासाईहेलोथ्रिन 5 ई.सी. 500 एम.एल. मात्रा, मैलाथियान 50 ई.सी. 1.50 लीटर मात्रा 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हैक्टेयर तथा मैलाथियान 4 प्रतिशत डस्ट 25 किलो प्रति हैक्टेयर छिड़काव से किया जा सकता है।
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