कन्हैया शर्मा

मथुरा बरसाना विश्व विख्यात तीर्थ नगरी श्रीधाम बरसाना में राधा रानी के निज मंदिर में राधा जन्म महोत्सव मनाया जा रहा है 1 सप्ताह चलने वाले महोत्सव में आज प्रातः 4:00 बजे श्री कृष्ण प्रिया लाडली जी का भव्य अभिषेक किया गया कोरोना महामारी के चलते श्रद्धालु भक्तजन रहे दर्शनों से वंचित कोविड-19  महामारी के चलते मंदिर परिसर में सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से श्रद्धालुओं को दर्शन से होना पड़ा निराश लाखों की संख्या में आने वाले बरसाना में श्रद्धालु जन इस बार बरसाना नहीं आ सके राधा अष्टमी की पूर्व संध्या को बरसाना नंदगांव द्वारा संयुक्त समाज को मंदिर में प्रशासन ने नहीं होने दिया  जिस वजह से गोस्वामी समाज द्वारा नीचे मंदिर  के प्रांगण में नंदगांव बरसाना गोस्वामी समाज द्वारा समाज गायन किया गया ब्रज के  रसिक जनों द्वारा की गई रचनाओं को उच्च स्वर में आनंद मगन हो गायन किया जाता है शास्त्र पुराणों में राधा रानी की महिमा को गाया गया है जिसके अनेकों उदाहरण पुराणों में मिलते हैं

पुराणों में राधारानी की महिमा

तं कृष्णं स च तां च परस्परम् ।

श्री राधा कृष्ण को भजति है.. और श्री कृष्ण राधा को... इस तरह वे एक दूसरे के भक्त हैं।

 ब्रह्म वैवर्त पुराण:

अथागत्य महाभागा राधा रासेश्वरी परा।

वहाँ राधिका रानी पधारी जो रासमंड़ल की परम् देवी हैं।

 ज्ञनारद पुराण: 

तं दृष्ट्वा स्वसुतं राधा मुग्धं श्रृंगारभंगदम्।

उन्होंने (श्री कृष्ण ने) राधारानी को देखा जो श्रृंगार वैभव से सुशोभित हैं।

गर्ग संहिता: 

राधा स्मृत्वा दुःखं वियोगजम्॥


राधारानी के स्मरण मात्र से ही सभी दुःख पलायन हो जाते हैं।

 लक्ष्मी नारायण संहिता:

 लक्ष्मीः सरस्वती सावित्री शिवा राधिकेति ताः।

लक्ष्मी, सरस्वती, सावित्री, पार्वती ये सब राधारानी के ही स्वरूप हैं।

 पद्म पुराण:

प्रधानप्रकृतिस्त्वाद्या राधा चंद्रावती समा।

श्री राधा ही मूल प्रधानप्रकृति है तथा चन्द्रावती की सखी है।

 शिव पुराण:

भविष्यति प्रिया राधा तत्सुता द्वापरान्ततः।

सर्वेश्वरी श्री राधारानी, श्री कृष्ण की प्रेयसी, वृषभान की पुत्री बनकर द्वापर युग के अंत में अवतरित हुई हैं।

देवी भागवत पुराण: 

राधा प्रधाना सध्रीची धन्या मान्या मनोहरा॥

राधारानी परम् प्रधान विधात्री हैं, कृष्ण की मंडिनी, उनके मन को मोहने वाली प्रिया हैं।

मत्स्य पुराण: 

रुक्मिणी द्वारवत्यान्तु राधा वृन्दावने वने।

रुक्मिणी (लक्ष्मी) द्वारका में तथा राधारानी वृंदावन के हर वन में स्थित हैं। विश्वात्मा भगवान श्री कृष्ण की प्राण शक्ति सरूपा श्री राधा रानी की कथाओं का पुराणों में वर्णन किया गया है दक्षिण भारत से आए श्री नारायण भट्ट जी को श्री राधा रानी का  ब्रह्मा चल पर्वत से ही श्री विग्रह प्राप्त हुआ था 1602 में भव्य अभिषेक किया गया था आज भी यह परंपरा चली आ रही है द्वापर युग के अनुसार राधा रानी  जन्म का विवरण ब्रह्मवैवर्त पुराण में मिलता है

 *भाद्रपद शुक्ल पक्ष मे श्री राधा रानी व अष्ट सखियों के आविर्भाव की तिथियों का वर्णन किया गया है उनके माता-पिता के नाम भी बताए गए हैं

बरसाना को वृषभानपुर के नाम से भी जाना जाता है राधा रानी के

पिता- वृषभानगोप

माता- किर्तिदा देवी

गावं- बरसना

जन्म- भाद्रपद शुक्ल पक्ष, अष्टमी


*1.ललिता सखी*

   पिता- महाभानु गोप

   माता- शारदी

   गांव- ऊँचागांव

   जन्म- भाद्रपद, शुक्ल पक्ष, षष्ठी.


*2. विशाखा सखी*

    पिता- सुभानु गोप

    माता- देवदानी

    गांव- ऑजनोख (अंजन वन)

    जन्म- भाद्रपद, शुक्ल पक्ष, नवमी.


*3. इन्दूलेखा सखी*

    पिता- रणधीर गोप

    माता- सुमुखी

    गांव- रांकोली (रंकपूर)

    जन्म- भाद्रपद, शुक्ल पक्ष,     एकादशी.


*4. चंप्कलता सखी*

    पिता- मनुभूप

    माता- सुकंठी

    गांव- करहला (करह वन)

    जन्म- भाद्रपद, शुक्ल पक्ष, सप्तमी.


*5. चित्रलेखा (चित्रा) सखी*

    पिता- ब्रजोदर गोप

    माता- अवन्तिका

    गांव- चिकसोली

    जन्म- भाद्रपद, शुक्ल पक्ष, दशमी.


*6. तुंगविध्या सखी*

    पिता- अंगद गोप

    माता- ब्रह्मकर्णी

    गांव- कमाई

    जन्म- भाद्रपद, शुक्ल पक्ष, पंचमी.


*7. रंगदेवी सखी*

    पिता- वीरभानु गोप

    माता- सुर्यवती

    गांव- डभारा

    जन्म- भाद्रपद, शुक्ल पक्ष, त्रयोदशी.


*8. सुदेवी सखी*

    पिता- गौरभानु गोप

    माता- कलावती

    गांव- सुनहरा

    जन्म- भाद्रपद, शुक्ल पक्ष, चतुर्थी. अष्ट सखियों सहित राधा रानी के जन्म उत्सव की लीला द्वापर युग से चली आ रही जैसे बूढ़ी लीला के नाम से जाना जाता है हर वर्ष राधा कृष्ण के स्वरूप द्वारा यह लीला अनेक स्थानों पर की जाती है इस परंपरा को ब्रज मंडल में आज भी निभाया जा रहा है हर वर्ष यह हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है

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