रिपोर्टर मनोज कुमार


मंगलवार १५ सितम्बर २०२० 

महराजगंज सोनौली सरकार ने प्याज की सभी किस्मो के निर्यात पर सरकार प्रभाव के प्रतिबंध लगा दिया है।इसकी वजह घरेलू बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाना और कीमती पर नियंत्रण रखना है।विदेश ब्यपार महा निर्देशल्य (डी जी एफटी) ने इस सम्बंध में सोमवार को जारी की।

अतिसूचना के मुताबिक प्याज के सभी किस्मो के निर्यात को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाता है।(डी जी एफटी) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत कार्य करता है।यह आयात निर्यात से जुड़ी मुद्दों को देखने वाली ईकाई है।देश में प्याज की क़ीमत बढ़ गई है।और घरेलू बाजार में इसकी कमी है।यह कमी मौसमी है।लेकिन कोविड 19 महामारी के दौरान पिछले कुछ महीनों में प्याज का ब्यपार निर्यात हुआ है।भारत से अप्रैल जून के दौरान 19,8 करोड़ डॉलर का निर्यात किया।जबकि पिछले पूरे साल 44 करोड़ डॉलर के प्याज का निर्यात हुआ था। भारत से बांग्लादेश मलेशिया यूएइ और श्रीलंका को प्याज का सबसे अधिक निर्यात होता है।

महाराष्ट्र कर्नाटक मध्यप्रदेश बिहार और गुजरात मुख्य प्याज़ उत्पादक देश है।देश के कुल प्याज़ पैदावार 40 प्रतिशत फसल के दौरान उत्पादित होता है।प्याज़ का कारोबार करने वाले कारोबारियों के अनुसार देश में सबसे पहले प्याज की फसल कर्नाटक में तैयार होती है।लेकिन वहां कई हिस्सों में भारी बारिश के कारण काफी फसल बर्बाद हो गई है।इससे प्याज की कीमत में बढ़ोतरी हो रही है। महाराष्ट्र के नाशिक और मध्यप्रदेश के शाजापुर में प्याज़ की आवक कम हुई है। प्याज का भंडार किया तो गया है। लेकिन बारिश की करण पिछले हफ्ते मंडी में प्याज कम मात्रा में पहुची है। 2019 में सरकार प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था।और प्रति टन प्याज पर 850  डॉलर का एमईपी भी लगा दिया था।महाराष्ट्र सहित प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यो में भरी बारिश और बाढ़ के कारण एमईपी दर के नीचे किसी वस्तु के निर्यात की अनुमति नहीं होती है।

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