* अनुमंडल, विधानसभा को समाप्त किया गया, कल- कारखाने भी बंद पड़े हैं

* वर्षों पूर्व प्रस्तावित एवं सर्वेक्षित कर्पूरीग्राम- ताजपुर- महुआ-भगवानपुर नई रेल लाईन योजना भी ठंडे बस्ते में

समस्तीपुर/ताजपुर:

  बढ़ते समय के साथ आगे बढ़ने की परिपाटी रही है लेकिन ताजपुर में इसके उल्टा होते रहा है. यहाँ के नकारा, चुप्पा एवं भाई- भतीजावाद के शिकार जनप्रतिनिधि के कारण इसके साथ सौतेलापूर्ण व्यवहार होता रहा है लेकिन इस बार यहाँ के मतदाता झूठे घोषणाबाजों को सबक सिखाने के मुड में है. ये बातें चर्चित महिला अधिकार नेत्री सह ऐपवा जिलाध्यक्ष बंदना सिंह ने बुधवार को कहा.

   उन्होंने ताजपुर की सरकारी एवं प्रशासनिक उपेक्षा पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डालते हुए बताया कि अंग्रेज जमाने के बसे बड़ा बाजार होने के कारण दूर-दराज के लोग व्यवसाय के सिलसिले में यहाँ आते रहे हैं. अंग्रेज जमाने में ताजपुर अनुमंडल था. आजादी के बाद यह दर्जा समाप्त कर दिया गया. यह चर्चित विधानसभा क्षेत्र था. 1972 में कर्पूरी ठाकुर को हराने के उद्देश्य से विधानसभा क्षेत्र समाप्त कर दिया गया. 

 पूरव समस्तीपुर जंक्शन, पश्चिम हाजीपुर, उत्तर कर्पूरीग्राम और दक्षिण पटोरी के बीच खाली पड़े इस समतल भूभाग को रेल से जोड़ने के उद्देश्य से तत्कालीन रेलमंत्री ललित नारायण मिश्र द्वारा कर्पूरीग्राम- ताजपुर- महुआ-भगवानपुर नई रेल लाईन योजना के लिए लोकसभा में प्रस्ताव लया गया फिर सर्वे भी हुआ. कई सरकारें आई- गई. घोषणा कई बार हुआ लेकिन मामला जस का तस पड़ा रहा.

  किसानों के लिए वर्षा का जल संग्रह कर सिचाई की बेहतर व्यवस्था के लिए कर्पूरी ठाकुर द्वारा नून नदी परियोजना चलाया गया था, इसे धनराशि के आभाव में अधूरा छोड़ दिया गया. स्थानीय मोतीपुर सब्जीमंडी में स्वीश बैंक की सहायता से 2 सौ बेड के अस्पताल का शिलान्यास हुआ पर यह भी राजनीति की भेंट चढ़ गई. बगल के गंगापुर में तत्कालीन मंत्री रामविलास पासवान द्वारा सेल की मदद से आईटीआई कालेज का आधारशिला रखा गया पर कालेज तो नहीं बना अलबत्ता किसानों से औने- पौने दाम में ली गई जमीन भी भूमाफियाओं ने बेच डाले. रौड फैक्ट्री, चप्पल फैक्ट्री आदि ताजपुर का शोभा हुआ करता था, वेसब भी काल के गाल में समा गये. ताजपुर बाजार में आजतक नाले नहीं बनाए गये, हल्की वर्षा में यह तैरते नजर आता है. सब्जी उत्पादक क्षेत्र होने के कारण मोतीपुर सब्जीमंडी किसानों के आमदनी का मुख्य जरीया है पर यहाँ आजतक शौचालय, शेड, गोदाम, बैंक, एटीएम, सुरक्षा गार्ड, बिजली, पेयजल आदि की व्यवस्था नहीं होने के कारण दूर-दराज के सब्जी व्यवसाई नहीं आ पाते हैं.

  16 पंचायत वाला यह प्रखण्ड समस्तीपुर एवं मोरबा विधानसभा क्षेत्र और समस्तीपुर- उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र में बंटा है पर तू- तू, मैं- मैं के चक्कर में विकास की किरण से कोशों दूर है. यहाँ करीब हरेक दल की मौजूदगी रही है पर विकास पर ध्यान देने के बजाए वे चुनावी लाभ लेते रहे हैं. अधिकांश जनप्रतिनिधि स्वयं का घर भरते रहे हैं.तमाम दलों की लोलूपता से परेशान यहाँ के लोगों से 6-7 साल से भाकपा माले के बैनर तले भूले- बिसरे मुद्दे का पहचान दिलाकर ताजपुर के संपूर्ण विकास के लिए आवाज उठा रहे हैं. इस बार यहाँ के लोगों ने ताजपुर के पीछड़ेपन का मुद्दा जोर-शोर से उठाना शुरू किया है. जाति- धर्म के बजाए मुद्दे पर चुनाव हो, इसके लिए ऐपवा सह भाकपा माले नेत्री बंदना सिंह के नेतृत्व में लगाकर बैठक, सभा, धरना-प्रदर्शन आदि के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रहीं है. इनका मेहनत क्या रंग लाएगा, ये तो निकट भविष्य में दिखेगा.

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