सिद्धार्थनगर।बाढ़ की त्रासदी अब देश में नियमित हो गई है। जीवन के लिए जो जल जीवनदाई वरदान हैं वही अभिशाप साबित हो रहा है। इन आपदाओं के बाद केंद्र व राज्य सरकारें आपदा प्रबंधन पर अरबों रुपए खर्च करती है। करोड़ों रुपए बतौर मुआवजा देती है। इसके बावजूद भी आदमी है कि आपदा का संकट झेलते रहने को मजबूर बना हुआ है। इस गहन परिस्थिति से निजात पाने के लिए देश में अन्य हित धारकों व ग्रामीणों की सेना तैयार की जा रही है और सभी को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बता दें कि सिद्धार्थनगर जिले में 15 सितंबर  से क्रमवार मॉक अभ्यास किए जाने के क्रम में आज 16 सितंबर  को उसका बाजार  के निकट  रानीगंज सदर तहसील सिद्धार्थनगर  में बाढ़ की तैयारी को लेकर  कूड़ा नदी के तट पर बाढ़ आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए एनडीआरएफ व जिला आपदा प्रबंधन सिद्धार्थ नगर व अन्य हित धारकों के संयुक्त तत्वाधान में मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया।

इस मॉक अभ्यास के दौरान एनडीआरएफ व अन्य हित धारी विभागों को सिद्धार्थनगर जिले के ईओसी द्वारा सूचना दी गई कि राप्ती नदी तथा उसकी सहायक नदी में बाढ़ आने के कारण आसपास के ग्रामीण क्षेत्र जलमग्न हो गया। जिससे यातायात के सारे साधन पूरी तरह से बाधित हो गए। जिसके कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया और लोगों में हाहाकार मच गया। यह सूचना प्राप्त होते ही एनडीआरएफ व अन्य हित धारी विभाग हरकत में आ गए। निरीक्षक गोपी गुप्ता के नेतृत्व में एनडीआरएफ की टीम अपने बचाव कर्ताओं व अत्याधुनिक उपकरणों सहित तत्काल ही घटनास्थल के लिए रवाना हो गई। इस दौरान पुलिस प्रशासन ने एक ग्रीन कॉरिडॉर बनाया जिससे उत्तरदाई टीम व एंबुलेंस सेवा घटनास्थल पर जल्द पहुंच सके।

एनडीआरएफ घटनास्थल पर पहुंचते ही अविलंब ऑपरेशन शुरू कर दिया और बाढ़ से बेहाल और तबाह गांव जहां जलमग्न घरों में भूखे प्यासे लोग बच्चे महिलाएं और मदद के लिए पुकार रहे थे, उनको सुरक्षित बाहर निकाले। तभी एक यात्रियों से भरी नाव ज्यादा यात्री सवार होने की वजह से कुछ लोग कूड़ा नदी में गिर गए। जिसकी सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की टीम के बचाव कर्मी अपनी मोटर बोट के साथ डूबते हुए लोगों के पास पहुंचे और तुरंत कार्रवाई  करते हुए बचाव कर्मियों ने विभिन्न बचाव के तरीकों से डूबते हुए लोगों को बचाया और घायल व्यक्तियों को अस्पताल से पूर्व दिए जानवाला उपचार दिया गया। साथ ही घरेलू संसाधन से बनावटी राफ्ट का इस्तमाल करते हुए अपने आपको बाढ के दौरान कैसे सुरक्षित रख सकते है, इसके बारे में पत्यक्षित दिखाया। जिसमे खाली बॉटल, मटका, बंबू, थर्माकोल,खाली कैन द्वारा बने राफ्ट का प्रयोग दिखाया गया।

वही अंत में एक व्यक्ति के लापता होने की खबर मिलने पर एनडीआरएफ के कुशल गोताखोरों के द्वारा पानी के अंदर सर्च किया गया और बाहर निकाला गया। जिसे समय रहते सीपीआर दिया गया तथा तत्पश्चात नजदीक हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। इस अभ्यास में एनडीआरएफ के द्वारा ऑपरेशन की स्थापित किया गया। जिसमें मेडिकल पोस्ट किया गया। जहां पीड़ितों का प्राथमिक उपचार दिया जा रहा था। स्टेजिंग एरिया जहां से संसाधनों की आपूर्ति हो रही थी। व्यवस्था में सेटेलाइट, फोन,  वीडियो सेट किए गए। जिससे सूचनाओं का आदान-प्रदान आसानी से हो सके अभ्यास का मुख्य उद्देश जिला प्रशासन और आपसी तालमेल को सुदृढ़ बनाना वह जन समुदाय को जागरुक करना था। जिससे आने वाले समय में प्रदेश आने वाली बाढ़ जैसी भीषण आपदा में बेहतर प्रबंधन किया जा सके।

यह मॉक अभ्यास सिद्धार्थनगर जिला अधिकारी दीपक मीणा के निगरानी में संपन्न हुआ। जिसमें क्षेत्रीय प्रमुख  निरीक्षक गोपी गुप्ता, उपनिरीक्षक  विक्रम सिंह, सहायक उप निरीक्षक हुकुमचंद  और  एसएन राय तथा संचार  के सहायक उपनिरीक्षक भुनेश्वर एवं  इंडिया रेप के अन्य रेस्क्यूर का अहम सहयोग रहा। इसके अलावा बाढ़ में डूबे हुए व्यक्तियों को बाहर निकालने के लिए  आरक्षी सोनू यादव, प्रदीप कुमार ,जितेंद्र यादव मुख  मुख्य  आरक्षी  अरुण कुमार  आरक्षी रामराज मोरिया  आरक्षी दीपचंद आरक्षी अशोक कुमार  आरक्षी रत्नाकर मिश्रा और उनके अन्य सहकर्मी तथा अस्पताल से पूर्व दी जाने वाली चिकित्सा में आरक्षी सामान्य  अनिरुद्ध पांडे और अन्य सहकर्मियों का योगदान रहा। इसकी जानकारी NDRF के मीडिया प्रभारी ने दिया।

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