UK/ विकासनगर देहरादून

विकास नगर से पुलिस के द्वारा हिंदी पत्रिका संवाददाता इलम सिंह चौहान

जब किसी प्रदेश का नेतृत्व कमजोर हाथों में होता है तब वहां की नौकरशाही बेलगाम हो जाती है। इस समय इस बात का सबसे अच्छा उदाहरण उत्तराखंड की सरकार है।

ताजा मामला उत्तराखंड जल विद्युत निगम से जुड़ा है। निगम के अधिकारी कैसे अपनी मनमानी चलाते हैं और कोर्ट तक के आदेश को रद्दी के टोकरे में डाल देते हैं इसका सबसे बड़ा उदाहरण देखने को तब मिला जब 24-8-2020 को आये पीएसटी  कोर्ट के निर्णय को अभी तक लागू नहीं किया गया है।

दरअसल पूरा मामला उत्तराखंड जल विद्युत निगम में सीनियरटी लिस्ट को लेकर है। जब यह मामला एक पक्ष कोर्ट लेकर गया और सूचना के अधिकार के तहत कुछ सूचना जुटाई तो उन्होंने पाया कि जिन लोगों को वरिष्ठता क्रम में आगे रखा गया है उनकी तो एंट्री ही पिछले दरवाजे से हो रखी है।

दरअसल 24-6-2019  पीएसटी देहरादून के द्वारा राम सिंह


बिष्ट, शांति प्रसाद, अरविंद त्रिपाठी, मुकेश कुमार, जगदीश सिंह असवाल, विपिन चन्द्र पाल, महावीर सिंह के अधिशासी अभियंता के पद पर पदोनति नियमो के खिलाफ मानी है l साथ ही उपरोक्त सहित 25 लोगों की वर्ष 2011 और वर्ष 2012 की अवर अभियंता  से सहायक अभियंता के पद पर की गई पदोन्नति भी नियमो के खिलाफ मानी है l 

यहां पर सवाल ये है कि ये विभाग प्रदेश के मुख्यमंत्री खुद देख रहे हैं ऐसा लगता है की प्रबंधक निदेशक, ujvnl ने  ईमानदार  मुख्यमंत्री और ईमानदार ऊर्जा सचिव को या तो अंधेरे मे रखा है या फिर कुछ ओर मामला है l  मुख्य मंत्री का विभाग होने के बावजूद भी इतनी बड़ी गड़बड़ी देखने को मिली है। इतना ही नहीं विभाग के अधिकारी कोर्ट का निर्णय आने से एक दिन पहले इन लोगों का प्रमोशन कर देते हैl अब सवाल यह है की क्या प्रबंध निदेशक, ujvnl अपने को कोर्ट से ऊपर मानते है? क्या यह प्रदेश अंधेर नगरी चौपट राजा बन गई है ?  उन्हें ये शंका थी  कि कोर्ट का निर्णय हमारे विरुद्ध आने वाला है उसके बाद भी विभाग के अधिकारियों का ये साहस करना अपने आप में बहुत कुछ कहता है। सूत्रों से ज्ञात हुआ है की कोर्ट का निर्णय आने की खबर पा कर,  एक दिन पहले MD ऑफिस मे बंद कमरे मे कुछ सेटिंग की गई या कुछ ओर झोल है जिसके बाद कोर्ट के निर्णय का इंतजार ना करते हुए सीधे MD खुद जज से ऊपर जज बन गये और नियमो के खिलाफ जाकर पदोन्नति कर दी l अब सवाल यह है की बंद कमरे मे ऐसी क्या वार्ता हुई की MD ने  नियमो के खिलाफ जाकर पदोन्नति कर दी यह जांच का विषय है क्युकी इसमें भ्र्ष्टाचार की बू आ रही है l जबकि एक फैसला पिछले साल पदोन्नत अभियंता के खिलाफ पहले ही आ रखा था l अब सवाल यह है की हमारे प्रदेश की ईमानदार ऊर्जा सचिव क्या प्रबंधन निदेशक और मानव संसाधन के खिलाफ बंद कमरे मे हुई वार्ता की जाँच करेंगी ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ करवाई हो l

मामला संज्ञान में आने पर जब इस पूरे मुद्दे पर हमने विभाग के एमडी संदीप सिंघल से बात की तो उन्होंने ये कहते हुए हमें टाल दिया कि इस मुद्दे पर अभी कुछ कहना उचित नहीं होगा क्योंकि ये मामला सब जुडिशियल है। इसके बावजूद भी निर्णय आने से एक दिन पहले संदीप सिंघल इन लोगों को नियमो के खिलाफ जाकर अधिशासी अभियंता के पद पर प्रमोशन दे देते हैं। अगर इतने बड़े प्रबंधन  और मानव संसाधन को नियमो का ज्ञान नहीं है तो यह पद पर क्यों बने है यह भी सवाल उठता है l

बहरहाल कोर्ट ने 24-8-2020 के अपने फैसले में प्रमोशन को लेकर साफ लिखा है कि ये प्रमोशन गलत तरीके से दिये गये है और निगम ने कोर्ट के फैसले के अधीन मामले को रखा था जिसे जायदा से जायदा दो दिन मे रिवर्ट करना चाहिए था l पर ऐसा लगता है की बंद कमरे मे कोई बड़ी डील हुई है जिसका कर्ज प्रबंधन पदोन्नत अभियंताओ को रिवर्ट ना करके चूका रहा है । मगर कोर्ट का निर्णय आने के बाद आज लगभग 10 दिन हो गये है परन्तु उत्तराखंड जल विद्युत निगम द्धारा इन लोगों को रिवर्ट नहीं किया गया है। जो कि सीधा-सीधा कोर्ट के आदेश कि अवहेलना है। मगर दूसरी तरफ प्रमोशन रातों-रात दिया जाता है।

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1 comments:

  1. https://www.facebook.com/2364424746936356/posts/3231096273602528/?app=fbl
    आखिर क्यों कार्यवाई नहीं होती है लिखित शिकायतें करने पर भी कार्यवाई शून्य है,
    #हाईकोर्टनैनीतालउतराखड़ के आदेश पर भी कार्यवाई नहीं होती है, #देहरादून #छावनीपरिषददेहरादून के सभासद का रिश्तेदार अबैध निर्माण कर रहा है,#छावनीपरिषददेहरादून भ्रष्ट अधिकारी व कर्मचारियों की मिली भगत से यह अबैध निर्माण हो रहा है,

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