👉संवाददाता प्रमोद कुमार जायसवाल की रिपोर्ट:- *नई दिल्ली*: कृषि कानून के विरोध में दिल्ली  कूच के लिए आमदा हजारों किसान खुले आसमान के नीचे एक और रात बिताने के लिए तैयार हैं. *दिल्ली चलो* अभियान' के तहत पिछले दो दिन से हरियाणा-पंजाब के किसान दिल्ली जाने के लिए निकले हुए हैं, जिससे नेशनल हाईवे 44 पूरी तरह से जाम है. किसानों का कहना है कि वे रविवार को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक का इंतजार करेंगे, जिसमें आगे की रूपरेखा तय होगी. तब तक सभी सिंघू पर ही रहेंगे.

वहीं पंजाब से राजधानी दिल्ली में प्रवेश करने के मुख्य बिंदु सिंघू और टिकरी बॉर्डर पर किसानों की संख्या काफी बढ़ गई है. धड़े के नेताओं ने दावा किया कि एक लाख से अधिक किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, बसों और अन्य वाहनों में राष्ट्रीय राजधानी की तरफ मार्च कर रहे हैं. टिकरी बॉर्डर पर शुक्रवार की शाम से ही धरना दे रहे सुखविंदर सिंह ने कहा, 'हम यहां प्रदर्शन करना जारी रखेंगे. हम यहां से नहीं हटेंगे. हरियाणा के कई अन्य किसान भी हमारे साथ आने वाले हैं. वे रास्ते में हैं.'

रशन, बर्तन, कंबल लेकर पूरी तैयारी करके आए किसानकिसान लंबे समय तक जमे रहने के लिए तैयार होकर आए हैं, उनके वाहनों में राशन, बर्तन, कंबल लदे हुए हैं और उन्होंने फोन चार्ज करने के लिए चार्जर भी साथ रखा हुआ है. स्पष्ट रूपरेखा नहीं होने के बावजूद पंजाब के 30 संगठनों सहित कई समूहों के किसानों का संकल्प स्पष्ट है और उनमें से कुछ का कहना है कि जब तक कानून वापस नहीं लिया जाता है तब तक वे यहां से नहीं हटेंगे और कुछ किसानों का कहना है कि वे सुनिश्चित करेंगे कि उनकी आवाज सुनी जाए. ये मुख्यत: पंजाब और हरियाणा के किसान हैं लेकिन मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और राजस्थान के किसान भी यहां आए हुए हैं.!

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