*महाराजगंज--* महाराजगंज जनपद के भारत नेपाल सीमा से नजदीक बसे कोल्हुई बाज़ार तस्करो का केंद्र हमेशा बना रहा है जहां से तमाम चीजों का तस्करी कोल्हुई से नजदीकी बॉर्डर खैरा, बुडवा, सोनपिपरी आदि घाटों से होती है इसी क्रम में आए दिनों कोल्हुई कस्बे से खाद की तस्करी सबाब पर चल रही है जानकारी के लिए बता दे कि  नेपाल बॉर्डर नजदीक होने के नाते तस्करी पर लगाम लगाने के उद्देश्य से बॉर्डर से कुछ किलोमीटर दूर कोल्हुई कस्बे से सटे पेट्रोल पंप के आगे से खाद की बिक्री का लाइसेंस जारी किया गया है ,जहा खाद की बिक्री की जाती है लेकिन कोल्हुई पुलिस के रहमोकरम से खाद तस्कर बेखौफ होकर खाद की तस्करी कर रहे है । बताते चले आए दिनों कोल्हुई चौराहे से विगत कई महीनों से टेम्पो, ठेले ,पिकअप पर एक बार में करीब 25/30 बोरी खाद लादकर  सुबह भोर से ही 10/15 चक्कर कोल्हुई कस्बे से चंदनपुर रोड तथा उक्त घाटों पर जाता है जो क्षेत्र में लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है आखिर इतनी मात्रा में प्रतिदिन ये खाद कहा जाता है ?और ये किसका खाद है जो प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कहा खपाई जा रही है ?आखिर किसके संरक्षण में ये बड़ी मात्रा में खाद प्रतिदिन बेखौफ होकर चौराहे से गुजरता है और चौराहे पर खड़े सिपाही इसको रोकने तक ही हिमाकत नहीं करते ? बताते चले उक्त तस्करी क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है ,सूत्रों से जानकारी मिली है कि प्रतिदिन सैकड़ों बोरा खाद चंदनपुर रोड पर स्थित एक गोदाम में सुबह से डंप होता है और दोपहर तक खाली हो जाता है जिसकी जांच किया जाना अति आवश्यक है।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अगर क्षेत्र के खाद की दुकानों का स्टॉक रजिस्टर का मिलान कर लिया जाए तो एक बड़ा घपला सामने आएगा और तो और खाद विक्रेताओं की भी पोल खुल जाएगी जो कि ग्राहकों से मोटी रकम वसूल भी करते है अर्थात निर्धारित सरकारी मूल्य में ग्राहकों को खाद ना देकर 100 से 150 रुपये अधिक लेते है जो कि  गरीब किसानों पर भारी पड़ रहा है साथ ही दुकानदार सरकारी राजस्व को चुना लगाकर मलाई काट रहे है। सूत्रों द्वारा यह भी बताया गया बड़े तस्करो को रोकने के बजाय कोल्हुई थाने में तैनात कुछ सिपाही भी जरूरतमंद किसानों से जो भी अपनी साईकल तथा मोटरसाइकिल पर अपने निजी खेती के लिए खाद ले जा रहे है उनसे भी चंदनपुर मोड़ पर रोक कर  100 -200 रुपये की अवैध वसूली कर रहे है। सूत्रों के मुताबिक कोल्हुई थानाध्यक्ष रामसहाय चौहान की तैनाती जब से हुई है तब से तस्करो का बोलबाला क्षेत्र में बढ़ गया है और तस्करी का खेल अनवरत जारी है चाहे वह मटर, छोहाडी, कालीमिर्च, सुपारी की तस्करी हो या खाद की वह निरंतर जारी है जिसका परिणाम यह है थानाध्यक्ष की लापरवाही अर्थात उनकी संरक्षण से तस्कर सरकारी राजस्व को चुना लगा बाइज्जत घूम रहे है। बताते चले अभी कुछ माह पूर्व मौजूद थानाध्यक्ष रामसहाय चौहान पर कोल्हुई ग्रामीणों द्वारा कनाडियन मटर की तस्करी कराने का गंभीर आरोप लगाया गया था और तस्करो को 5 गाडियो समेत पकड़कर जबरजस्त कुटाई की गई थी जिसमे थानाध्यक्ष की पूरे जिले में किरकरी भी हुई थी, सूत्रों के अनुसार मटर तस्करी पर आरोप लगने के बाद भी थानाध्यक्ष अपनी हरकतों से बाज नही आ रहे है और तस्करो को खाद तस्करी के लिए संरक्षण दे रहे है जो कि निंदनीय एवं शर्मनाक है तथा थानाध्यक्ष के इस रवैये से स्थानीय क्षेत्र की जनता परेशान है और लगातार थानाध्यक्ष के कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे है ।बडा सवाल यह की कब तक जारी रहेगा क्षेत्र में तस्करी का खेल , आखिर किसके सह पर थानाध्यक्ष अपनी मनमानी करते है और अगर मनमानी नही तो क्षेत्र में बढ़ती अपराधों पर निरंकुश लगाने में क्यों फेल हो गए है थानाध्यक्ष चाहे वह तस्करी हो चाहे चोरी की घटनाएँ क्या उनको उच्चाधिकारियो तथा सरकार का डर नही है। अब देखने की बात यह होगी कि  उच्चाधिकारियो द्वारा उक्त तस्करी को संज्ञान में लेते हुए थानाध्यक्ष रामसहाय चौहान को इसके रोकथाम हेतु क्या दिशा निर्देश दी जाती है।

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