रिपोर्ट :- *विमल गौतम इटावा *बढ़पुरा उदी:-* 

प्रदेश की योगी सरकार ने बूचड़ खानों को बंद करवाकर गोवंश की सुरक्षा के लिए बड़ी योजनाओं पर काम करते हुए ऐसे अपराध को करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही तो कर दी है,और यह अभियान लगातार जारी भी है लेकिन इन आवारा पशुओं को नियंत्रित कर पाना सरकार और स्थानीय प्रशाशन के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।नतीजा ये है कि ये जानवर अब किसानो के दुश्मन बन रहे हैं और खेतों में खड़ी लहलहाती फसल को चट कर जा रहे हैं।बढ़पुरा पारपर्टी क्षेत्र में गौशाला  होने के  बावजूद भी आवारा छुट्टा जानवर  किसानों के खेतों में धावा बोलने लगे हैं,दर्जनों आवारा जानवर खेत में घुसकर सरसों (लहिया) की फसल को चौपट कर रहे हैं,और किसानों का लाखों का नुकसान हो रहा है,छेत्र के बहुत से गाँव में किसानों की गेंहू एवं सरसों की फसल आवारा जानवरों की वजह से चौपट हो गई है , यह जानवर सरसों की फसल चर कर खत्म कर दे रहे हैं। प्रदेश सरकार और जिले के अधिकारियों से मदद की गुहार लगा रहे हैं। किसान हजारों की पूंजी लगाकर किसानो ने सरसों एवं गेंहू की फसल की रोपाई की है लेकिन बिना नियंत्रण के घूम रहे ये पशु इन फसलों को अपने पैरों तले रौंद रहे हैं और उन्हें खा रहे हैं।सिर्फ सरसों ही नहीं गेंहू की फसल भी यह आवारा गोवंश चौपट कर रहे हैं,लेकिन इन किसानों की सुनने वाला कोई नहीं है।बढ़पुरा पार पट्टी छेत्र में तमाम गौशालाएं  होने होने के बावजूद भी हैं की। गौशाला योजना को पलीता सा लग गया है।वही देखा जाए तो जो लोग गाय या भैंस पाले हुए हैं वह दूध दुह कर जानवर को छुट्टा छोड़ देते हैं जिससे यही जानवर नुकसान कर रहे हैं,छेत्र में आवारा पशुओं की तादात दिन ब दिन बढ़ती जा रही है, और इनकी बढ़ती हुई तादाद किसानों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है जिन्होंने ब्याज पर पैसे लेकर अपनी फसलों की बुआई की है।आखिर इन किसानो को आवारा पशुओं से किसानो को छुटकारा कैसे मिलें इसका संतोषजनक जवाब न शासन के पास है और ना ही प्रशासन के पास।

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